Thursday, April 19, 2018

हाइकु

हाइकु हिंदी काव्य का नवीनतम छंद है। इसमें तीन चरण या पद होते हैं। पहले चरण में पाँच वर्ण, दूसरे में सात वर्ण एवं तीसरे में पाँच वर्ण होते हैं। इस तरह तीनों चरणों में कुल सत्रह वर्ण( स्वर या स्वर युक्त व्यंजन होते हैं। स्वर रहित व्यंजन (हलन्त) की गिनती नहीं की जाती, जैसे सत्कार में त् की गणना नही की जाएगी । इस शब्द में स, का और र की ही गणना की जाएगी । इस गणना में लघु/दीर्घ मात्राएँ समान रूप से गिनी जाती हैं अर्थात् सत्कार में 1+1+1=3 वर्ण ही माने जाएँगे।

हाइकु मूल रूप से जापानी कविता है। "हाइकु का जन्म जापानी संस्कृति की परम्परा, जापानी जनमानस और सौन्दर्य चेतना में हुआ और वहीं पला है। हाइकु में अनेक विचार-धाराएँ मिलती हैं- जैसे बौद्ध-धर्म (आदि रूप, उसका चीनी और जापानी परिवर्तित रूप, विशेष रूप से जेन सम्प्रदाय) चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति। यह भी कहा जा सकता है कि एक "हाइकु" में इन सब विचार-धाराओं की झाँकी मिल जाती है या "हाइकु" इन सबका दर्पण है।"[1] हाइकु को काव्य विधा के रूप में बाशो (१६४४-१६९४) ने प्रतिष्ठा प्रदान की। हाइकु मात्सुओ बाशो के हाथों सँबरकर १७ वीं शताब्दी में जीवन के दर्शन से जुड़ कर जापानी कविता की युगधारा के रूप में प्रस्फुटित हुआ। आज हाइकु जापानी साहित्य की सीमाओं को लाँघकर विश्व साहित्य की निधि बन चुका है।
  • हाइकु अनुभूति के चरम क्षण की कविता है।[2]
  • बिंब समीपता (juxtaposition of the images) हाइकु संरचना का मूल लक्षण है। इस से पाठक को रचना के भाव में अपने आप को सहिकारी बनाने की जगह मिल जाती है।
  • हाइकु कविता तीन पंक्तियों में लिखी जाती है। हिंदी हाइकु के लिए पहली पंक्ति में ५ अक्षर, दूसरी में ७ अक्षर और तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर, इस प्रकार कुल १७ अक्षर की कविता है। हाइकु अनेक भाषाओं में लिखे जाते हैं; लेकिन वर्णों या पदों की गिनती का क्रम अलग-अलग होता है। तीन पंक्तियों का नियम सभी में अपनाया जाता है।
  • ऋतुसूचक शब्द (कीगो)- एक अच्छे हाइकु में ऋतुसूचक शब्द आना चाहिए। लेकिन सदा ऐसा हो, यह जरूरी नही। हाइकु, प्रकृति तथा प्राणिमात्र के प्रति प्रेम का भाव मन में जगाता है। अत: मानव की अन्त: प्रकॄति भी इसका विषय हो सकती है।
  • हिन्दी में हाइकु लिखने की दिशा में बहुत तेजी आई है। लगभग सभी पत्र-पत्रिकाएँ हाइकु कविताएँ प्रकाशित कर रही हैं। आकाशवाणीदिल्ली तथा दूरदर्शन द्वारा हाइकु कविताओं को कविगोष्ठियों के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है। लगभग ४०० (चार सौ) से अधिक हिन्दी हाइकु संकलन हिन्दी में प्रकाशित हो चुके हैं। हिंदी में संपूर्ण रूप से हाइकु पर आधारित एक अनियत कालीन पत्रिका हाइकु दर्पण[3]है।

कक्षा- 10वीं हिंदी पुस्तक विशेष

















1.1 भारत महिमा - जयशंकर प्रसाद - विधा : कविता

1.1 भारत महिमा - जयशंकर प्रसाद - विधा : कविता





जयशंकर प्रसाद (अंग्रेज़ी: Jaishankar Prasad, जन्म: 30 जनवरी, 1889, वाराणसी, उत्तर प्रदेश - मृत्यु: 15 नवम्बर, 1937) 

हिन्दी नाट्य जगत् और कथा साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। कथा साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी देन महत्त्वपूर्ण है। भावना-प्रधान कहानी लिखने वालों में जयशंकर प्रसाद अनुपम थे।छायावादी काव्य धारा के विकास में जयशंकर प्रसाद का महत्वपूर्ण स्थान है। इनकी काव्य कृतियां छायावादी युग की प्रतिनिधि रचनाओं के रूप में जानी जाती हैं। इनके काव्य के माध्यम से छायावादी युग की विसंगतियों को आसानी से समझा जा सकता है।

महाकवि के रूप में सुविख्यात जयशंकर प्रसाद  हिंदी नाट्य जगत और कथा साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। तितली, कंकाल और इरावती जैसे उपन्यास और आकाशदीप, मधुआ और पुरस्कार जैसी कहानियाँ उनके गद्य लेखन की अपूर्व ऊँचाइयाँ हैं। विषय सूची. [छुपाएँ]. 1 जीवन परिचय; 2 प्रमुख रचनाएं. 2.1 काव्य; 2.2 नाटक; 2.3 कहानी संग्रह; 2.4 उपन्यास. जीवन परिचय. जन्म: ३० जनवरी १८९० को वाराणसी में। स्कूली शिक्षा आठवीं तक किंतु घर पर संस्कृत, अंग्रेज़ी, पाली, प्राकृत भाषाओं का अध्ययन।



भारत महिमा 

हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार

उषा ने हँस अभिनंदन किया और पहनाया हीरक हार।

जगे हम, लगे जगाने विश्व लोक में फैला फिर आलोक
व्योम–तम–पुंज हुआ तब नाश अखिल संसृति हो उठी अशोक।

विमल वाणी ने वीणा ली कमल–कोमल–कर में सप्रीत
सप्तस्वर सप्तसिंधु में उठे छिड़ा तब मधुर साम–संगीत।

हमारे संचय में था दान अतिथि थे सदा हमारे देव
वचन में सत्य, हृदय में तेज प्रतिज्ञा में रहती थी टेव।

वही है रक्त, वही है देश वही है साहस, वैसा ज्ञान
वही है शांति, वही है शक्ति वही हम दिव्य आर्य संतान।

जिये तो सदा इसी के लिये यही अभिमान रहे, यह हर्ष
निछावर कर दें हम सर्वस्य हमारा प्यारा भारतवर्ष।




Monday, April 9, 2018

अंतर्गत मूल्यमापन

अंतर्गत मूल्यमापन 
 लोकभारती (संपूर्ण)
प्रथम सत्र (50 अंक)+ द्वितिय सत्र (50 अंक) =  100 अंक
इकाई परीक्षा (चाचणी) – 20 अंक
उपयोजित लेखन – 10 अंक (सादरीकरण)
क्षमतामापन  - 10 अंक
उपक्रम  - 10 अंक

लोकवाणी (संयुक्त)
प्रथम सत्र (25 अंक)+ द्वितिय सत्र (25 अंक) =  50 अंक
इकाई परीक्षा (चाचणी) – 10 अंक
उपयोजित लेखन – 5 अंक (सादरीकरण)
क्षमतामापन  - 5 अंक
उपक्रम  - 5  अंक

एक सत्र में केवल एक ही उपक्रम अपेक्षित
उपयोजित लेखन – 
रचना विभाग के अंतर्गत आने वाली रचनाओं का प्रत्यक्ष सादरीकरण – गुटचर्चा या वैयक्तिक रुप से
कक्षास्तर पर मूल्यमापन अपेक्षित
उदा. निबंधस्पर्धा, विज्ञापन सादरीकरण आदि

उपक्रम – 
भाषिक ज्ञान को बढावा देने वाले, सहजता से किए जा सकने वाले, अनुभवविश्व तथा उम्र के अनुरूप गुटकार्य द्वारा उपक्रम दिए जा सकतें हैं ।
क्षमतामापन – 
भाषण, संभाषण क्षमतामपन के लिए कविता, दोहे सादरीकरण स्पर्धा का आयोजन अथवा गुटचर्चा की जा सकती है ।

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Sunday, October 1, 2017

हिंदी लोकभारती- कक्षा 9वीं- अंक विभाजन- रचना विभाग

हिंदी लोकभारती  कक्षा 9वीं
अंक विभाजन
विभाग 5 रचना विभाग

1)  पत्रलेखन  ( 5 अंक)
·         प्रेषक का पता और दिनांक - ½ अंक
·         संबोधन/ अभिवादन        - ½ अंक
·         विषय                    - ½ अंक
·         विषय विवेचन             - 2 अंक
·         प्रेषक का हस्ताक्षर/ स्वनिर्देश - ½ अंक
·         लिफाफा                  - 1 अंक

2)  गद्य आकलन ( 5 अंक)
प्रत्येक उचित प्रश्न के लिए 1 अंक

3)  कहानी लेखन ( 6 अंक)
शीर्षक          - ½ अंक
कहानी विस्तार   - 4 अंक
भाषाभिव्यक्ति    - 1 अंक
सीख           - ½ अंक

4)  प्रसंग वर्णन ( 5 अंक)
·         प्रसंग का यथातथ्य प्रयोग
·         भाषा का उचित प्रयोग
·         शुद्‍धता

5)  वृत्तांत लेखन ( 5 अंक)
·         स्थल, काल एवं घटना का होना अनिवार्य
·         सीमित श्ब्दों में यथातथ्य वर्णन

6)  विज्ञापन ( 5 अंक)
·         आकर्षकता             - 1 अंक
·         आवश्यक सीमित शब्द   – 2 अंक
·         स्पष्टता               - 1 अंक
·         संपर्क आदि            - 1 अंक

7)  निबंध ( 8 अंक)
·         प्रारंभ                 - 1 अंक
·         विस्तार               - 3 अंक
·         भाषाभिव्यक्ति          - 2 अंक
(मुहावरेंदार भाषा, सुवचन से प्रयुक्त भाषा)
·         शुद्‍धता               - 1 अंक

·         समापन               - 1 अंक

हिंदी लोकवाणी कक्षा 9वीं रचना विभाग अंक विभाजन

हिंदी लोकवाणी  कक्षा 9वीं
अंक विभाजन
विभाग 4 रचना विभाग ( 18 अंक)

*      पत्रलेखन  ( 4 अंक)
·         प्रेषक का पता और दिनांक   
संबोधन/ अभिवादन        - 1½ अंक
·         विषय विवेचन              - 1½ अंक
·         लिफाफा                  - 1 अंक

*      कहानी लेखन ( 4 अंक)
शीर्षक          - ½ अंक
कहानी विस्तार   - 3 अंक
सीख           - ½ अंक

*      गद्य आकलन ( 4 अंक)
प्रत्येक उचित प्रश्न के लिए 1 अंक

*      विज्ञापन ( 4 अंक)
·         आकर्षकता             - 1 अंक
·         भाषाभिव्यक्ति
(आवश्यक सीमित शब्द) – 2 अंक
·         संपर्क आदि            - 1 अंक

*      निबंध ( 6 अंक)
·         प्रारंभ                 - 1 अंक
·         विस्तार               - 2 अंक
·         भाषाभिव्यक्ति          - 1 अंक
(मुहावरेंदार भाषा, सुवचन से प्रयुक्त भाषा)
·         शुद्‍धता               - 1 अंक

·         समापन               - 1 अंक

व्याकरण विभाग हिंदी लोकवाणी कक्षा 9वीं


भाषा अध्ययन - व्याकरण विभाग                                  (10 अंक)

प्र. 3 ) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए|    
1)  मानक वर्तनी के अनुसार सही शब्द लिखिए|                                                              (1)
i)              XXXXX   -             ………………                 ii) XXXX. - ………………          

2)    निम्नलिखित अव्यय का अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए|                                              (1)
XXXXX

3)    सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए|                                                                 (2)
i)              XXXXXXXXXX  (सामान्य वर्तमानकाल) 
ii)             XXXXXXXXXXX (पूर्ण भूतकाल)

4)    निम्नलिखित  मुहावरों का अर्थ लिखकर उनका सार्थक वाक्य में प्रयोग कीजिए|                    (2)
i)              XXXXXXXXX
ii)             XXXXXXXXX

5)    कोष्टक में दिए गए शब्दों की संधि तथा विग्रह कर उनका प्रकार पहचानिए।                        (2)

शब्द
विग्रह
संधि
प्रकार
सूर्योदय
सूर्य + उदय
अ + उ
स्वर संधि
वाग्बाण
वाक्‍ + बाण
…………..
…………..
निष्कपट
…………..
: का ष्‍
…………..


6)    रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार बताइए| / अर्थ की दृष्टि से वाक्य पहचानिए।                   (2)
i)              XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX
ii)             XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX



बूढ़ी काकी

बूढ़ी काकी व्हीडीओ देखें.   https://youtu.be/H4D_eIQZGoE              बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्...